शंकर कुमार " शानिध्य"
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Construction |
| Occupation | फिनांस एंड अकाउंटस |
| Location | श्री खंडी भिट्ठा, सुरसंड, सीतामढ़ी, , बिहार, India |
| Introduction | फूल मुझे पसंद नहीं, मै कांटो का दीवाना हू! मै जलने वाली आग नहीं, जल जाने वाला परवाना हूँ ! ख्वाब मुझे पसंद नहीं, मै हकीकत का आशियाना हूँ ! मै मीटने वाली हसरत नहीं, जीने वाला अफसाना हूँ ! मै थमने वाला वक़्त नहीं, न छु पाने वाला कीनारा हूँ! मै रूकने वाली सांस नहीं, सदा दील मे धडकने वाला सहारा हु!...नीगाहे बचाकर जो चलते है हमसे , कभी उनको हमसे मोहोब्बत हुई थी जो महबूब से अजनबी हो गए है कभी उनको हमसे मोहोब्बत हुई थी...तुझे खोना भी मुश्कील है, तुझे पाना भी मुश्कील है. जरा सी बात पर आंखें भीगो के बैठ जाते हो, तुझे अब अपने दील का हाल बताना भी मुश्किल है, उदासी तेरे चहरे पे गवारा भी नहीं लेकीन, तेरी खातीर सीतारे तोड़ कर लाना भी मुश्कील है, यहाँ लोगों ने खुद पे परदे इतने डाल रखे हैं, कीस के दील में क्या है नज़र आना भी मुश्कील है, तुझे जींदगी भर याद रखने की कसम तो नहीं ली, पर एक पल के लिए तुझे भुलाना भी मुश्कील है , |
| Interests | संगीत, लेखन एंड अध्ययन, मूवी देखना, घूमना, धर्म के बरे में जानना |
| Favorite movies | प्यासा, नाम, बीस साल बाद, बागवान, आनंद |
| Favorite music | नदिया चले चले रे धारा चंदा चले चले रे तारा, तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा |
| Favorite books | वन्दे मातरम, प्रेमाश्रम, लोलिता |
