babul
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Communications or Media |
| Occupation | Sr. Sub Editor |
| Location | Gwalior, M.P., India |
| Introduction | बहते हुये दरिया का अपना वजूद और रूतवा होता है। जिसको वह चाहती है, अपने साथ बहा ले जाती है..., और जब उसका चाहना न हो तो किनारे पर उलीच जाती है? मैं भी ऐसा ही हूं... जो दरिया के साथ बहना तो चाहता था...., लेकिन वह मुझे किनारे पर उलीच कर तड़पता हुआ छोड़ गयी? अब मुझे लगता है कि चलो दरिया पार करते हुये, खुद के साथ तमाम लोगों को भी देखा जाये? क्योंकि एक उम्मीद तो जगी रहती है कि इस किनारे की दुनियां से, दरिया के उस पार की दुनियां शायद हम सभी के लिये बेहतर हो...? एक उसका मेरी जिन्दगी में आते से ही चले जाना मुझे .... अतृप्त किये बैठा है? और उस पार बेहतरी की उम्मीद दरिया के ठुकराने के बावजूद , मुझे टूटकर बिखरने से बचाये रखती है। कुछ और बातें फिर कभी आपके चाहने पर... । |
| Interests | किताबें पढऩा, लिखना, अपने ही नहीं अपने करीबियों के दु:ख दर्द को सांझा करना, साथ ही सोसायटी फॉर दी प्रोटेक्शन ऑफ एनवायरनमेंन्ट एण्ड वाइल्ड लाईफ संस्था (एन.जी.ओ.)के बहाने मूक जानवरों के बारे में लिखा-पढ़ी कर सरकार और समाज की नींद हराम करना। सुकून मिलता है कभी आप भी करके देखियेगा? |
| Favorite movies | समाज से सवाल करती राजकपूर कि फिल्में। प्यासा के बहाने प्रेम तलाशने की जिद् में ''ये दुनिया तुम्हारी है, तुम्हीं सम्हालो ये दुनिया ÓÓ कहकर समूची दुनिया ही सौंपते गुरुदत्त जी। |
| Favorite music | संगीत वह जो सुर के सिरहाने बैठ लबों को गुनगुनाने पर मजबूर कर दे... |
| Favorite books | सामाजिक ताने-बाने के इर्द-गिर्द घूमती मुंशी प्रेमचन्द और रविन्द्रनाथ ठाकुर की रचनाएं और विकसित और स्वार्थी होती दुनिया में अमृता प्रीतम को जीवन में मिले प्रेम को पाने का-सा ख्वाब उनकी पुस्तकें पढ़ कर ही महसूसी जा सकती है। |

