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प्रकाश चंद्रायन/ मेरी द्वारका प्रसाद से कुछ मुलाकातें हैं।उनका पहिया उपन्यास भी पढ़ा है। कारपोरेट मीडिया का अंतरंग है उसमें। वह रांची के ही प्रकाशन से छपा था। वह फ्रायडियन लेखक थे। हैं
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