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शब्द साक्षी
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About me

GenderFemale
IndustryStudent
Locationदिल्ली , India
Introductionहिंदी साहित्य में स्नातक मिरांडा हाउस से किया । उन्मुक्त गगन का पंछी, पिंजर बद्ध न रह पायेगा । आत्मकेंद्रित नहीँ आत्मंथन में विश्वास रखती हूँ । और 'निदा फ़ाज़ली' के शब्दों में कहूँ तो - "कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी चैन से जीने की सूरत ना हुई... जिस से जब तक मिले दिल ही दिल से मिले दिल जो बदला तो फ़साना बदला ।"
Interests। सबसे अधिक रुचि घंटों अपने साथ बिताने की है ।
Favorite booksमंटो प्रिय हैं । अब्दुल कलाम को पढ़कर सुकून मिला । उनकी लिखी एक किताब को पढ़कर लगा की जैसे मेरा शिक्षक बड़े विश्वास से पास बैठा मुझे समझा रहा हो ।
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