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कल्पना मनोरमा (Kalpana Manorama)
On Blogger since: April 2019
Profile views: 1,457

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About me

GenderFemale
IndustryEducation
Occupationअध्यापन, स्वतंत्र लेखन- कहानी ,लेख ,गीत-नवगीत आदि
LocationSOUTH WEST DELHI, Delhi, India
Introductionभीतर की ओर लौटना जारी है। इस यात्रा में लेखन मेरा पथप्रदर्शक बना है — एक ऐसा गाइड, जो अनदेखे रास्तों पर भी साथ नहीं छोड़ता। यदि शब्दों की सच्चाई तक पहुँच सकी, तो कुछ कहने, कुछ लिखने का प्रयास करूँगी। नहीं तो कल्पना की उड़ान के सहारे लोकव्यापी यथार्थ की देहलीज़ तक जाती रहूँगी — क्योंकि साहित्यिक धरातल पर तो अभी एक चींटी ने घुटनों के बल सरकना भर शुरू किया है। चलना और दौड़ना अभी बाकी है। यह "बाक़ी" शब्द... कितना कुछ समेटे हुए है अपने भीतर! मनुष्य यदि पूर्ण संतुष्ट हो जाए, तो वह अपनी जगह से कभी हिल ही नहीं पाएगा। यही "बाक़ी" की महिमा है — जो कील की तरह दिल में गड़ी रहती है। शायद यही अधूरापन बार-बार पृथ्वी पर लौट आने की प्यास बनता है। मैंने तो अभी बस कलम पकड़नी सीखी है — लिखना अभी बाक़ी है। हाँ, अब तक जो कुछ भी कह सकी हूँ, उसकी ऊष्मा लोक से मिली है — और उसे वापस लौटाने की, उसे शब्दों में ढालकर साझा करने की प्रतिबद्धता मेरे भीतर है। यदि किसी मूक मन की वेदना को अपनी आवाज़ दे सकूँ, यदि कुछ अपने और कुछ आपके मन की बात बिना लाग-लपेट कह सकूँ — तो यही कलम मेरी सबसे सच्ची उपलब्धि होगी। कहना तो बस इतना है — बात बने, तो यूँ ही छन्न से।
Interestsऐसा साहित्य पढ़ना है जिसका समय के साथ गाढ़ा रचाव हो,सहित्य सृजन में कहनी -कथा ,गीत-नवगीत आदि के लेखन में लिप्त रहना रुचिकर कार्य है.
Favorite moviesथ्री ईडियट ,अभिमान ,लंच बॉक्स , गाइड, आदि आदि
Favorite musicवो संगीत जो मन को रूहानियत से भर दे | सोना महा पात्रा ,रेखाभाद्वाज को सुनना .......
Favorite booksशेखर एक जीवनी ,देह की मुंडेर पर ,कनुप्रिया ,गुनाहों के देवता ,गीतांजलि, रात का रिपोर्टर , एक चिथड़ा सुख, नदी के द्वीप, अन्या से अनन्या तक, पानी बिन मीन प्यासी आदि आदि

What's the earliest you've gotten up to watch cartoons and what did you see?

"किसी स्त्री को देखकर तुम तुरंत जजमेंटल क्यों हो जाते हो? मैं तुम जैसी बिल्कुल नहीं हूँ — लेकिन इतना ज़रूर जानती हूँ कि स्त्री भी, सबसे पहले, एक 'व्यक्ति' होती है। और किसी व्यक्ति का निर्माण सिर्फ़ उसकी अपनी इच्छा से नहीं होता — उसके भीतर का बहुत कुछ उसके परिवेश और परिस्थितियाँ गढ़ती हैं। इसलिए, उसे समझने से पहले, उसकी ज़िंदगी को समझो। उसके फैसलों को नहीं, उसकी विवशताओं को देखो। हर स्त्री की एक अल

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