ओम पुरोहित'कागद'
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Education |
| Occupation | प्रधानाध्यापक |
| Location | हनुमानगढ़ संगम, राजस्थान, India |
| Introduction | शब्द यात्रा करते हैं और वे इस यात्रा में संवेदना अंवेरते अपना अर्थ पाते हैं । मैं तो बस उन शब्दों का पीछा करता हूँ .... अक्षरों के बीज जाने किसने बो दिए पानी देते-देते हमने जिंदगी गुजार दी । कोरा कागद है मन मेरा और जिंदगी तलाश है कुछ शब्दों की... ओम पुरोहित ’कागद’ 09414380571 |
| Interests | साहित्य,चित्रकला,संगीत,भ्रमण |
| Favorite movies | बैजू बावरा, मुगले आजम, रुदाली, पा, प्यासा, भंवर, पाथेर पांचाली, पार्टी, दो आँखे बारह हाथ, आँखे, गोलमाल, शोले, चुपके-चुपके, अभिमान,मन,शब्द |
| Favorite music | गुलाम अली, मेहंदी हसन, परवीन शाकिर, फरीदा खानम, चित्रा सिंह,जगजीत की गजलें |
| Favorite books | लू, बादली, माटी री महक, राती घाटी, अब आगे सुनो, ग-गीत, इस मौसम में, वह एक समुन्द्र था, आड़ी ताने- तिरछी ताने, घमसान, धरती कद तांईँ घूमेली, दुर्घटनाओँ के इर्द गिर्द , एक अकेला सूरज खेले,सीता,बुगचो,मारग,पागी,कावड,बदऴती सरगम, बणतो इतिहास,देसून्टो,आती हैजैसे म्रत्यु,आ बैठ बात करां,मँत्री री बेटी,सिराजी और अन्य कहानियां,सच ढूंढ़ते रह जाओगे,शिकार तथा अन्य कहानियां,मत बांधो आकाश,जीव री जात,अंतस-तास,ताळवै चित्योड़ीभ,घर,पेड़ का दुख,सरणागत,बातां री फुलवाड़ी, सुकांत के सपनों में, घर, पेड़ का दुःख, कलायण, मेघमाळ, आपरे पांती री चिन्तावा, चिंटू पिंटू री सूझ, जल है तो कल है, योग शिक्षा जीवन रक्षा, कामायनी, शेखर-एक जीवनी, बादळी, आंख भर चितराम,म्हारै पांती री चिंतावां.....अर सगळो राजस्थानी साहित्य |
