Blogger
श्रीजी के चरणारविन्द
On Blogger since: December 2010
Profile views: 255

My blogs

Blogs I follow

About me

GenderFemale
Locationvrindavan-श्रीजी के चरणारविन्द, u.p.
Introductionश्रीजी के चरणारविन्द!! मित्र जन भगवान के नाम लीला कथा रहस्य अत्यंत कृपा-कल्याण कारी हैं ..भक्त-संत आज्ञा कर गए हैं की भगवान के चरित्र बड़े ही भाव-श्रृद्धा-विश्वास के साथ श्रवण करने चाहिए .. यथा गोस्वामी जी श्री राम चरित मानस में लिखे हैं "उमा राम गुण गूढ़ पंडित मुनि पावहीं बिरति-पावहीं मोह बिमूढ़ जे हरी बिमुख न धर्म रति"..अर्थार्त ..पंडित-मुनि भगवद चरित्रों को सुन-समझ कर वैराग्य प्राप्त करते हैं जबकि जिनका मन श्री राम में नहीं है वो महामूर्ख चरित्र सुनकर मोह को प्राप्त होते हैं! कबि न होउं नहीं चतुर कहावउं ! मति अनुरूप राम गुन गावउं !! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे! हरे-हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे!! कृपया ध्यान रखें भगवान शंकर एवं भगवान विष्णु की निंदा करना तो दूर सुनना भी गौ-हत्या के समान पाप है.."हरि-हर निंदा सुनहिं जे काना- होई पाप गो घात समाना " प्रेम से गायें-हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे-हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे साभार स्वीट राधिका -राधे-राधे
Interestsश्रीजी के चरणारविन्द!! कबि न होउं नहीं चतुर कहावउं ! मति अनुरूप राम गुन गावउं !! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे-हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
Favorite moviesश्रीजी के चरणारविन्द मेंने पूछा भक्तों से कि देखा है कहीं ..ऐसे भगवान सा हँसी...गोपीजन वल्लभ सा हँसी ...पार्थसारथि सा हँसी... भक्तों ने कहा हमें भक्ति की सपथ नहीं..नहीं नहीं मेने पूछा जगत में कि देखा है कहीं ...गौर प्रेम सा कहीं ...मीरा भाव सा कहीं ..सूर अनुराग सा कहीं जगत ने कहा ..सब सुन्दरता की कसम नहीं-नहीं-नहीं
Favorite musicश्रीजी के चरणारविन्द!! प्रेम से गायें-हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे-हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे साभार स्वीट राधिका -राधे-राधे
Favorite booksश्रीजी के चरणारविन्द!! -श्री मद भागवतम -श्री मद भगवद गीता -श्री मद राम चरित मानस

Create a tagline for a new line of plastic bedsheets.

श्रीजी के चरणारविन्द मित्रो जगत में सदैव सद-बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि सद-विचारों से उन्नति-समृद्धि होती है एवं दुर्बुद्धि से हमेशा पतन-दुःख प्राप्त होते हैं -यद्धपि प्रत्येक मनुष्य में सद-बुद्धि(सुमति) एवं कुबुद्धि(कुमति) सामान रूप से विद्यमान रहती है-

Google apps
Main menu