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AMIT MISHRA
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GenderMale
Locationkanpur, uatter pradesh, India
Introductionहमारे शौक की ये इतंहा थी कदम रखा तो मंजिल रास्ता थी। स्कूल की तमाम खाक हो चुकी यादों में यही चंद पक्तियां शेष बची हैं, कारण बचपन में कभी पढ़ाई में मन लगा ही नहीं और जब आंखे खुली तब तक शायद बहुत देर हो चुकी थी। लेकिन तभी सौभाग्य से कन्फ्यूशिस की ये चंद लाइन पढ़ने को मिलीं- बुद्धि का अर्जन हम तीन तरीकों से कर सकते हैं- पहला- चिंतन से जो कि उत्तम है, दूसरा- दूसरों से सीखकर जो सबसे आसान है, और तीसरा- अनुभव से जो सबसे कठिन है। तब लगा के देर जरूर हो चुकी है, पर अब भी कुछ बिगड़ा नहीं है।
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