पंक्ति काव्या
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| Introduction | जड़ें शुष्क धरातल में हैं किन्तु पल्लवित मनुष्यों के असीम अनंत दृश्य में होना हुआ. भाग्य की रेखाओं से आती वायु के वेग में मेरी उम्र के बरस बर्फ के मैदानों तक बिखरे. वेदों की भाषा के अध्ययन, प्रसार, शिक्षण की कामना. |
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| Interests | काव्य, चित्रकला, संगीत |
