Rajak Haidar
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Communications or Media |
| Occupation | Journalism |
| Location | Jodhpur, Rajasthan, India |
| Introduction | "जो देखना चाहते हो मेरी उडान को , थोडा ऊंचा और करो आसमान को"... दुनिया मुझे रजाक हैदर के नाम से जानती है. ज़िंदगी की धूप-छांव और उसमें इंसानी रिश्तों को देखने के अपने नज़रिए ने मुझे शुरू-शुरू में कविताएं और गज़लें लिखनी सिखा दी. क़रीब सात सालों से लिख रहा हूं और तर्तीब से रखी कतरने बताती हैं कि अब तक कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में छप चुका हूं. यह मुहिम तो अब भी बदस्तूर जारी है. डीडवाना के बांगड़ कालेज में पढ़ते समय वाद-विवाद, भाषण और निबंध जैसी साहित्यिक गतिविधियों में 'गलती' से अव्वल आने पर जब अखबारों में नाम छप जाता तो बस यूं लगता जैसे जिन्दगी सफल हो गई. सम्पादक के नाम पत्र लिखते-लिखते नाम छपने के इस शौक ने जाने कब मुझे भी अखबारी दुनिया में धकेल दिया. सुना था कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है. बस इसीलिए मैंने भी मेरा शहर डीडवाना छोड़ दिया। वक्त की हवा ने पत्थरों के शहर पहुंचा दिया. इन दिनों जोधपुर में जड़ें हैं. और दैनिक अखबार राजस्थान पत्रिका में सिटी डेस्क पर कार्यरत हूं. और हां एक बात बताना भूल गया. पढ़ाई से मेरा नाता अभी टूटा नहीं है। मैं एल.एल.बी. का छात्र हूं। ना जाने कब 'काला कोट' पहनना पड़ जाए. और तो अपने बारे में क्या कहूं. बस इतना ही कहना चाहूंगा कि --- "करीब आओगे तो समझ लोगे हमें, ये फासले तो गलतफहमियां बढ़ाते हैं." |
| Favorite movies | रहना है तेरे दिल में, कभी खुशी कभी गम, जाने तू या ना जाने |
| Favorite music | संगीत को बस किशोर कुमार का है। |
| Favorite books | किताबों के बारें में मेरी राय जरा औरों से जुदा है। मुझे इस सूची में बड़े-बड़े लेखकों की मोटी-मोटी किताबें लिखना पसन्द नहीं। क्यों कि मुझे हर तरह की किताबें अच्छी लगती है। बचपन में सुपर कमाण्डों, नागराज, डोगा की कॉमिक्सें भी पढ़ी, तो चम्पक, बालहंस और नंदन को भी नहीं छोड़ा। बाद में जासूसी उपन्यास चाटने लगा। फिर साहित्य का चस्का लगा तो कॉलेज के पुस्तकालय से बशीर बदऱ, फैज, निदा फाजली को भी खूब पढ़ा। अब तो जो सामने मिल जाए। बस उसे ही पढ़ लेते हैं। |

