Awara Kalam
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| Gender | Female |
|---|---|
| Industry | Education |
| Occupation | None |
| Location | Bareilly, Uttar Pradesh, India |
| Introduction | जहां ग़ुर्बत अपने पांव पसार ले वहां बेबसी लोरियां सुनाती है और खिलौनों के ख़्वाब देखने वाला बचपन कभी नहीं आता. अपनी जिन्दगी में भी बचपन पांव दबा कर आया भी और हालात की तपिश में जल कर ख़ाक भी हो गया. होश इतना है कि रूबरू वह दो आंखें थीं, जिनमें कभी उम्मीदों के उजाले नहीं देखे और तन्हाई के सिवा अगर कुछ पास था तो बस काग़ज़-क़लम. आज भी ख़्वाब कुछ बड़े नहीं हैं, कुछ ज़्यादा नहीं हैं. बस आज भी ख़्याल उन्हीं बेउम्मीद आंखों का है और वास्ता उन्हीं काग़ज़-क़लम से है... |
