मुन्ना के.
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Education |
| Occupation | शोध(वह भी नाटकों पर) |
| Location | गोपालगंज, बिहार |
| Introduction | तब जिंदगी मजाक बन गयी थी,दिल्ली आया था घर छोड़कर कि कुछ काम-धंधा करुं और मजाक बनी जिंदगी को कुछ मतलब दूं। लेकिन यहां आकर मजाक-मजाक में पढ़ने लग गया. रामजस कॉलेज से बीए करने के बाद एमए करने का मूड हो आया. तब तक किताबों का चस्का लग गया था और इसी ने मुझे एमए में गोल्ड मेडल तक दिला दिया। थियेटर लीजेंड हबीब तनवीर के नाटक"बहादुर कलारिन"पर एम.फिल.के बाद..अब हंसिए मत, सच है कि मजाक-मजाक में ही जेआरएफ भी हो गया औऱ अब..अब क्या। भिखारी ठाकुर के नाटक पर डीयू से रिसर्च कर रहा हूं। जिस मजाक ने मुझे नक्कारा करार देने की कोशिश की आज भी उसी मजाक के लिए भटकता-फिरता हूं। पेशे से रिसर्चर होते हुए भी मिजाज से घुमक्कड़ हूं। फिल्में खूब देखता हूं,बतगुज्जन पर भरोसा है और पार्थसारथी पर बार-बार रात बिताने भागता रहता हूं। अब तो जिंदगी और मजाक दोनों से प्यार-सा हो गया है। |
| Interests | रंगमंच,सिनेमा,घुमक्कड़ी,बतगुज्जन,कॉफ़ी,यारी बनाना |
| Favorite movies | लिस्ट संभव नहीं है ...पक्का सिनेड़ी हूँ. |
| Favorite music | हर तरह का. |
| Favorite books | बहुत सारी है कितना लिखूं.. |

