अघोरेश्वर वाणी :-
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| Location | Matatirtha,Shivapuri,, Kathmandu, Nepal |
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| Introduction | "मै अघोरेश्वर स्वरुप ही स्वतंत्र, सर्वत्र, सर्वकाल में स्वछंद रमड करता हूँ l मै अघोरेश्वर ही सूर्य की किरडो, चन्द्रमा की रश्मियों, वायु के कडो और जल की हर बूंदों में ब्याप्त हूँ l मै अघोरेस्वर ही पृथ्वी के प्राणियों , वृक्षों,, लताओं, पुष्पों और वनस्पतियों में विथामन हूँ१ मै अघोरेस्वर ही प्रथ्वी और आकाश के बीच जो खाली है उसके कड कड में, तृष्रेणुओं में व्याप्त हूँ l साकार भी हूँ, निराकार भी हूँ1 प्रकाश में हूँ अन्धकार में भी मै ही हूँl सुख में हूँ और दुख में भी मैं ही हूँ l आशा में हूँ और निराशा में भी मै ही हूँ l भूत में, वर्तमान में और भविष्य में एक साथ ही विचरने वाला मै ही हूँ l मै ज्ञात भी और अज्ञात भी l स्वतंत्र भी हूँ और परतंत्र भी l आप जिस रूप में अपनी श्रधा-सहेली के साथ लेकर ढूढेंगे, मै उसी रूप में आपको मिलूँगा l" सत्यम्, सत्यम्, सत्यम् l |

