pahlapahar
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| Introduction | मुझे बचपन से ही कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी, परंतु जैसे-जैसे बड़ी होती गई हालात जिंदगी की सच्चाई को सामने लाने लगे। सपने एक-एक कर चूर होने लगे। जिंदगी का सच और सपने में क्या अंतर है यह समझ आने लगा। अंतर्मुखी होने के कारण अपनी व्यथा किसी से नहीं कह पाती थी, परंतु अब ब्लाग के जरिए अपने कुछ सपनों को हकीकत में बदलते हुए देखना चाहती हूं। |
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