शरद कोकास
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Communications or Media |
| Occupation | स्वतंत्र लेखन |
| Location | दुर्ग, छत्तीसगढ, India |
| Introduction | ‘पहल’ पत्रिका में प्रकाशित लंबी कविता “पुरातत्त्ववेत्ता” और “देह” के लिए चर्चित कवि शरद कोकास की और दो लंबी कविताएँ “पुरुरवा उर्वशी की समय यात्रा” तथा परमाणु बम के अविष्कारक “ओपेनहाइमर” पर लिखी लम्बी कविता ‘समालोचन’ वेब पत्रिका में प्रकाशित हैं । उनके छह कविता संकलन प्रकाशित हैं 1."गुनगुनी धूप में बैठकर " 2. 'हमसे तो बेहतर हैं रंग' 3. 'अनकही' 4 'सुख एकम दुःख' 5 'बिजूका' 6. चयनित कविताएं । उनकी गद्य पुस्तकों में "मन मशीन" "एक पुरातत्त्ववेत्ता की डायरी" "बैतूल से भंडारा" और "कोकास परिवार की चिठ्ठियाँ" अमेज़न पर बेस्ट सेलर हैं । कवि,लेखक,ब्लॉगर,पॉडकास्टर,हिप्नो व साइको थेरेपिस्ट शरद कोकास बतौर मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग भी करते हैं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा अंधश्रद्धा निर्मूलन पर व्याख्यान देते हैं साथ ही फेसबुक,व्हाट्सएप,इन्स्टाग्राम,ट्विटर आदि पर भी सक्रिय हैं । |
| Interests | कवितायें कहानियाँ लेख और समीक्षाएँ लिखना;ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढना;लोगों मे वैज्ञानिक दृष्टि के विकास के लिए और इतिहास बोध पैदा करने के लिये "मस्तिष्क की सत्ता" विषय पर व्याख्यान देना,फुरसत में कराओके पर् गीत गाना;हँसना हँसाना;बच्चों के साथ खेलना बडों के साथ बहस करना;गलियों-बाज़ारों में भटकना;तस्वीरें उतारना;ऑरकुट् पर् चेट करना वगैरह वगैरह् |
| Favorite movies | पाथेर पांचाली;उत्सव;तीसरी कसम;गाईड;मेरा नाम जोकर;ब्लैक ;लगान;आनन्द; |
| Favorite music | बिथोवन;भीमसेन जोशी;पंड्वानी बांसगीत;भरथरी;जगजीत् की गज़लें;लता किशोर रफी मुकेश के गीत् |
| Favorite books | आवारा मसीहा;मुक्तिबोध की आत्मकथा;काल बांका तिरछा; my life;आदिविद्रोही;नदी के द्वीप;मनुष्य महाबली कैसे बना;बुद्ध और उनका धम्म;विश्व का इतिहास;रामचरितमानस;कुरआन;बहुत नर्म चादर थी जल से बुनी'पुरातत्ववेत्ता |

