Nayan
| Industry | Education |
|---|---|
| Occupation | Research |
| Location | Uttarkashi, Uttarakhand, India |
| Introduction | ये कवितायेँ, ग़ज़लें मेरे अन्तःमन की ही अभिव्यक्ति है। जैसा महसूस करता हूँ उसी को ईमानदारी से लिख लेता हूँ। मिर्ज़ा ग़ालिब ने क्या खूब कहा है कि "आते हैं ग़ैब से ये मज़ामीं ख़याल में। 'ग़ालिब' सरीर-ए-ख़ामा नवा-ए-सरोश है।।" मैं भी इन सभी रचनाओं का श्रेय उसी कल्पना को देता हूँ जो हमेशा मेरे ह्रदय में रही और अब "ग्रन्थ.स्वराज" के स्वरुप में मेरे और अब आपके समक्ष है। तुमसे ही उर्वरित है जिस धरा पे मैं खड़ा हूँ, शब्दों में क्या कहूं मैं महत्व फिर तुम्हारा। बसंत हो या पतझड़ जड़ के ह्रदय में क्या है, तुम सींचती हो जीवन उपवन का प्राण सारा।। -राजीव नयन बहुगुणा 'नयन' |

