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Vikshipt Pathak
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LocationLucknow, Uttar Pradesh, India
Introductionभइया हम पक चुके हैं, अखबारों और न्यूज़ चैनलों की तानाशाही से... पाठक को क्या बिलकुल चू ... समझ रखा है की जो चाहा परोस दिया ... अमा मियाँ साढ़े तीन रुपये खर्च करो और पाओ रद्दी का मटेरिअल ... कम से कम इस मामले में, सरकारी विज्ञापन फाइलिंग के लिए छपने वाले अखबार बेहतर हैं कम से कम कूड़ा कचरा परोस कर पाठकों का मानसिक बलात्कार नहीं करते ... आप कहेंगे, लो आ गया एक और पागल अखबार वालों की बखिया उधेड़ने... जब हम पाठकों पर आप अत्याचार करेंगे तो कहीं न कहीं ये सड़ा हुआ मवाद निकलेगा ही... स्थिति यह हो गयी कि अख़बार उठाओ या न्यूज़ चैनल लगाओ तो पहले अपनी पढाई लिखाई भूल जाओ वरना पागल कर देंगे ये आजकल के पागल पत्रकार... साले... शीशे के पीछे से मुह चिढाते हैं, पत्थर मारने कि कोशिश की तो आपका ही नुकसान... अखबार फाड़ो तो आपके ही पैसे दाण जायेंगे... क्या करे पाठक अख़बार पढना छोड़ दे टीवी केवल नाच गाने के लिए देखे ... या "if you can't avoid it, lie down and enjoy it ... "जैसे विकृत जुमले की तर्ज़ पर हर सुबह अपना मानसिक बलात्कार करवाए ...
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