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Raag Darbaari
On Blogger since: October 2011
Profile views: 128

About me

GenderMale
IndustryPublishing
OccupationPoet
LocationDelhi, Delhi, India
Introductionमैं इस दुनिया में तब से हू जब से राज्य का जन्म हुआ। मैं दरबारों में जन्मा और उन्ही में रमा रहा। मैने हर कालखंड में खुद को खुदा मानने वाले राजा देखे और उन्हे धूल में मिटते देखा। सदियों की इस यात्रा में मैने साम्राज्यों और राजसी अहंकारों को इतिहास के कबाड़खाने में जाते हुए देखा। चाटुकारों के शाब्दिक शहद पर मुग्ध मदांध सम्राटों की आत्ममुग्धता का साक्षी भी मैं ही रहा हूॅं। सदियों की इस यात्रा में मैने देखा कि हर राजा अपने आगे वाले राजा में अवतार लेता है तो चाटुकार भी वेश बदलकर जन्म लेता रहता है। जब तक राजा रहेगा तब तक चाटुकारों की वंश बेलियां भी फलती फूलती रहेंगी। लोकतंत्र में भी हर उस जगह एक दरबार है जहां सत्ता है, अहंकार है। इस राजसी अहंकार ही नहीं राजनीतिक,आर्थिक,धार्मिक,सामाजिक,सांस्कृतिक दरबारों के खिलाफ राग दरबारी अपनी विद्रोही तान छेड़ता रहेगा।
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