शेखर मल्लिक
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| Gender | Male |
|---|---|
| Location | घाटशिला, झारखण्ड, India |
| Introduction | युवा लेखक, प्रलेसं - घाटशिला से संबद्ध मैं विश्वास करता हूँ प्रेम में. मानवीयता का पैरोकार हूँ. यही मेरा सरोकार है. प्रत्येक कला और मूलतः जीवन के भी पृष्ठ में प्रेम ही तो है. प्रेम से ही प्रत्येक कला का रचा जाना संभव है. प्रेम से जीवन का जिया जाना संभव है. प्रेम ही जीवन की संचालक शक्ति है और मानवीयता, हमारे इस धरती पर सर्वश्रेठ जीव होने का आधार. प्रेम ही तो मुक्त करता है. प्रेम विद्रोह है. इसलिए साहित्य भी विद्रोह है...विचारों द्वारा, शब्दों के जरिए... मैं प्रेम को ही साधने का प्रयास कर रहा हूँ, क्योंकि इसी से मेरी कला का भी साधा जाना संभव है. विचार मेरी शक्ति है और शब्द मेरे औजार. मैं स्वयं को किसी भी वाद या धारा से पृथक रखते हुए मूलतः मनुष्य के प्रति, उस अंतिम आदमी के स्वातंत्र्य, जिजीवषा , प्रेमोन्माद, सौंदर्य, उदारता-उदात्ता, विकास-प्रगति, और मानवीय मूल्यों का पक्षधर हूँ. मनुष्य की मुक्ति किसी धर्म या धारा से नहीं, मनुष्य बनकर जीने में ही फलीभूत हो सकती है. मेरा साहित्य मुक्ति का आकांक्षी है. प्रेम को शिरोधार्य करता है और लोक संवेदना से परिपूरित हो, ऐसी निष्ठावान चेष्टा करता है. प्रेम में मेरी अगाध आष्टा है और मेरा साहित्य इसका साक्ष्य... |
| Interests | प्रत्येक प्रकार की सृजनशीलता में. |
| Favorite books | गोदान, मैला आँचल, सुखा बरगद, संस्कार, मानवीनी भवाई,आधा गाँव, सूरज का सातवाँ घोड़ा, मुझे चाँद चाहिए, काशी का अस्सी इत्यादि |

