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राज बनकर निखिल
On Blogger since: June 2009
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About me

GenderMale
IndustryConstruction
Occupationक्रय विभाग (पॉवर प्लांट)
Locationरायपुर, छत्तीसगढ़, India
Introductionमेरे बारे में इससे श्रेष्ठ और कुछ नहीं हो सकता हैं कि मैं उस समुद्र की एक बूंद हूँ, जिस समुद्र का नाम "परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी महाराज (सदगुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी" हैं. कुछ कागज के नोटों को कमाना, कुछ कंकड़-पत्थर को जमा करना उन्होंने अपने शिष्यों को नहीं सिखाया. अपितु उन्होंने अपने शिष्यों को उत्तराधिकार में दिया : "प्रहार करने की कला - ताकि वे इस समाज में व्याप्त ढोंग और पाखण्ड पर प्रहार कर सके....... ..... और दे सके प्रेम, ताकि वे दग्ध हृदयों पर फुहार बनकर बरस सके, जलते हुए दिलों का मरहम बन सके, बिलखते हुए आंसुओं की हंसी बन सकें, छटपटाते हुए प्राणों की संजीवनी बन सकें." जीवन के कुछ पल मिले जिनमे वन्दनीय माताजी और गुरु त्रिमुर्तिजी के श्री चरणों में बैठने का सौभाग्य प्राप्त हुआ....... जो मेरे जीवन की सर्वश्रेष्ठ और अनमोल निधि हैं.... आज भी उनके चरणों की, उनके सानिध्य की कामना करता हूँ....... ....... .............. क्यूंकि जीवन का सौभाग्य यही हैं की मनुष्य इस जीवन में गुरु को प्राप्त करे.
Interestsमैं सबसे अधिक रूचि अपने गुरुदेव के श्री चरणों में बैठने में अनुभव करता हूँ. तीन लोक नव खण्ड में गुरु ते बड़ा न कोय! कर्ता करे न कर सके गुरु करे सो होय!! अर्थात् "तीन लोक और नव खण्ड में गुरु से बड़ा कोई अन्य व्यक्तित्व एक शिष्य के लिए कोई और हो ही नहीं सकता. यदि शिष्य के जीवन में कर्ता (प्रभु) भी कुछ करना चाहते हैं, मगर वे उस बदलाव (भाग्य परिवर्तन) को नहीं कर सकते, मगर यदि सदगुरु चाहे तो उसके जीवन में, उस शिष्य के भाग्य में इच्छानुसार परिवर्तन कर सकते हैं."
Favorite moviesमेरे पसंद में वही फिल्मे हैं. जो मेरे सदगुरुदेव जी के प्रवचन की हैं.... 1. - राज्याभिषेक दीक्षा : यह 1 जनवरी 1997 को सदगुरुदेव जी के द्वारा तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किये गए शिविर की विडियो फिल्म हैं. जिसमे पूज्य श्री द्वारा अपने शिष्यों को दुर्लभ और अप्राप्य दीक्षा "राज्याभिषेक दीक्षा" प्रदान की थी. कहा जाता हैं कि "जगदगुरु आदिशंकराचार्य" के गुरु गोविन्दपादाचार्य ने उसे यह दीक्षा दी थी. उसके बाद कोई भी व्यक्तित्व इस दीक्षा को अपने शिष्यों को पूर्णता के साथ प्रदान नहीं कर सका था. 2. दिव्य महोत्सव चंडीगढ़ : यह गुरु पूर्णिमा 1996 को चंडीगढ़ में मनाये गए शिविर की फिल्म हैं. जिसमें पूज्य श्री द्वारा यह बताया गया था कि गुरु वास्तव में क्या होता हैं? क्या होती हैं एक गुरु का शिष्य के प्रति कर्त्तव्य.... आदि. 3. शक्तिपात दीक्षा : यह फिल्म तो अद्वितीय हैं, जिसमे सदगुरुदेव जी ने अपने तीनो सुपुत्रों को अपने उपस्थित तमाम शिष्यों के समक्ष उनके मांग पर गुरु पद पर विराजित किया था.... और एक शिष्य के हठ और गुरु के शक्तिपात के बाद उसके पूर्व जन्म की कहानी, उसकी ही जुबानी..... और भी बहुत कुछ.....
Favorite books"मंत्र-तंत्र-यन्त्र विज्ञान", निखिल स्तवन, गुरु गीता, मंत्र रहस्य, ध्यान धारणा और समाधि, तांत्रिक सिद्धियाँ, गुरु सूत्र, निखिलेश्वरानंद चिंतन, निखिलेश्वरानंद रहस्य, दुर्लभ गोपनीय मंत्रो के रहस्य, हिमालय के योगियों की गुप्त सिद्धियाँ..... आदि... यह सारी गुरूजी कि लिखी पुस्तके हैं.
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