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maatapai
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Introductionशनि दोस्त या दुश्मन अपनी बहन के घर शनिदेव रामकिशोर पंवार ग्रहो मे शनि के बारे में यह आम धारणा है कि वह अपने बाप का भी नहीं है . जब उसे आना होता है तो या उसका प्रकोप जिस पर आने को होता है तो वह हर हाल में आता है . शनि के प्रकोप उसे सूर्यपुत्री ताप्ती और पवन पुत्र हनुमान के अलावा आज तक कोई नहीं बच पाया है. महाकाल स्वंय भगवान भोलेनाथ को भी शनि से बचने के लिए एक बार हाथी बन कर जंगल - जंगल घुमना पड़ा था . शनि के प्रकोप से शांती का एक मात्र माध्यम है वह उसकी सबसे प्यारी लाड़ली बहन ताप्ती जिस पर शनि देव की कृपा ऐसी है कि जो भी माँ ताप्ती की शरण मे गया है शनिदेव ने उसकी ओर फिर कभी मुड़ कर नहीं देखा है . कई बार यह सवाल उठता है कि क्या शनि हर किसी का शत्रु ही होता है ऐसा भी नही है . शनि अगर किसी पर मेहरबान हो जाए तो उसे मालामाल कर देता है . गुण एवं दोष एक सिक्के के दो पहलू होते है . शनि में भी दोष की अपेक्षा गुण अधिक है लेकिन शनि का नाम सुन कर अच्छे खासे की पतलून ढीली पड़ जाती है बरसो से लोगो के दिलो - दिमाग में बैठा शनि का डर इसके दोष को देखता चला आ रहा है लेकिन शनि के गुण को नजर अंदाज करने से यह पता नही चल पाता है कि शनि दोस्त है या दुश्मन ....
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