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Sud
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GenderMale
LocationIndia
Introductionमैं झुका था क्यों कि तुम्हारा मूल्य बहुत अधिक था | ये आज सोचता हूँ कितना? मंदिर में रखी चाँदी की प्रतिमा जितना, पर मैं इतना झुका कि मेरा ही मूल्य खो गया | तुम चाँदी से सोने की हो गईं, मैं मिट्टी का हो गया | मेरा न सम्मान न मूल्य बाक़ी था, दर्पण भी देखता तो नज़र झुक जाती थी ज़िंदगी कहीं भी कोई मूल्य नहीं पाती थी | जब भी नयनो में नीर आया, किसी ने भी जल चढ़ाया | तुम सोने की थीं और निखर गईं मैं मिट्टी का था घुल गया | तब मैं किसी को भी नहीं दिखता था, मंदिर आते जाते हर इंसान के पैरों से लिपटता था, अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जो खो दिया वो फिर से पाने के लिए.. ----मासूम शायर
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