पंकज शुक्ला
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Communications or Media |
| Occupation | journalist |
| Location | भोपाल, मध्यप्रदेश, India |
| Introduction | कोलंबस भी ऊब गया होगा, अपनी मीलों लंबी यात्रा में/ तेनजिंग ने भी महसूस की होगी हार, एवरेस्ट फतह के ठीक एक पल पूर्व/ बापू को भी असंभव लगी होगी आजादी, मुक्ति के ठीक एक क्षण पहले/ दुनिया में हर कहीं, जीत के ठीक एक पल पहले सौ टंच प्रबल होती है हार/ यह जानते हुए भी कि किनारे बैठ कर पार नहीं की जा सकेगी नदी/ उम्मीद और ना उम्मीद के बीच मैं क्यूँ हथियार डाल दूँ?.... लड़े बिना क्यूँ हार मान लूँ? (अपने संग्रह- ''सपनों के आसपास" से। मेरा यह कविता संग्रह 'मित्र-धन' ब्लाग' (http://mitradhan.blogspot.com) पर 'सपनों के आसपास' टेब के अन्तर्गत उपलब्ध है।) |
| Interests | reading, writing |

