हरीश जयपाल माली
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Education |
| Occupation | Teacher, Abstract Painter, Poet |
| Location | स्वर्ग का अंतिम छोर, विलायती मोहल्ला,ऐतबार गली, हिंदुस्तान, India |
| Introduction | मै अक़सर मुस्कुराने वाला एक खुशमिजाज़ प्राणी हूँ ।गैरों के दिल नहीं तोड़ता...और अगर गाहे-बगाहे तोड़ने-फोड़ने का जी करे तो भगवान के चरणों में नारियल तोड़ देता हूँ।मैं अपने खयालातों की जागीर कोरे कागजों को बांटता रहता हूँ आखिर दरिया दिल जो ठहरा...! ख्यालों और लफ्जों की असलियत ने हमेशा मेरा दिल जीता है इसी खातिर मुझे लिखने पढने की जैसे इक आदत सी हो गयी है..और मैं अपनी आदत से मजबूर हूँ। ''अंत नहीं आरम्भ लिखूंगा फ़ुर्सत में प्रारंभ लिखूंगा ख्वाहिश में विश्वास लिखूंगा आस नहीं प्रयास लिखूंगा क्रांति का आकार लिखूंगा शून्य नहीं विस्तार लिखूंगा इन्कलाब को पत्र लिखूंगा शास्त्र नहीं मैं शस्त्र लिखूंगा फ़ितरत के विरुद्ध लिखूंगा छाँव नहीं मैं धूप लिखूंगा हर मुमकिन तूफान लिखूंगा धार नहीं मंझधार लिखूंगा'' |
| Interests | ''ना खुद जीना और न किसी को जीने देना (तकलीफ़ों में)'' |
| Favorite movies | ''अब क्या बताएं आपको अभी इस लायक कोई फिल्म प्रदर्शित हुयी ही कहा है की हमारा मन मोह ले..'' |
| Favorite books | ''कोरी किताबें जिनके पन्नों पे अक्षरों का नाम-औ-निशान न हो'' |

