Blogger
Sarathi Kala Niketan
On Blogger since: January 2012
Profile views: 721

My blogs

Blogs I follow

About me

GenderMale
IndustryArts
LocationIndia
Introductionश्री सारथी उवाच--- 1.धर्म बहुत बड़ा विज्ञान है और विज्ञान बहुत बड़ा धर्म। यह साथ साथ ही अपनाए जाते हैं और अपनाए जाने चाहिए। यदि पृथकता, भिन्नता, और पक्षपात से अपनाए जायेंगे तो निश्चित ही दोनों का अर्थ, उपयोग, अभ्यास और प्रतिक्रिया उलटी हो जायेगी ।--------------- 2.मैं दर्शन को साहित्य की आत्मा मानता हूँ और सौन्दर्य को साहित्य का परम लक्ष्य।----------- 3.यदि कोई व्यक्ति चिल्ला कर बातें कर रहा हो, परन्तु क्रोध में न हो तो मैं उसे मौनधारी संत कहूँगा । यदि उस के चारों ओर भोग की वस्तुएं पड़ी हैं और वह लोभ में नहीं है तो वह मौन है चुप है । यदि वह अभिनय कर रहा है भाव भंगिमा से वह अभिमानी दिखाई दे रहा है परन्तु अभिमान और अहंकार उसे छू नहीं सकें हैं तो वह संसार का सब से बड़ा मौन साधक होगा । 4. परन्तु भगवन को यही पसंद है कि तुम सारे ही जगत से सारी ही सृष्टि से दया, भक्ति और प्रेम की भिक्षा मांगो । तुम संसार का सब से बड़ा भिखारी बन जाओ और प्रेम और भक्ति की भिक्षा मांगते फिरो और फिर तुम शीघ्र ही देखोगे कि तुम स्वयं ही प्रेम की, दया की, भक्ति की भिक्षा मांगते मांगते दया और प्रेम की प्रतिमूर्ति में परिवर्तित होने जा रहे हो । तुम भीख मांग नहीं रहे हो वरन भीख ही का रूप होने जा रहे हो ।
Google apps
Main menu