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Satish Kumar
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GenderMale
LocationUnited States
Introductionजीवन को पढ़ने-पहचानने, परखने-पाने की कोशिश में : - - “पर्वत की छाती क्यों फूली है? नदियों को बहने की आदत क्यों लगी है? - - आसमान को नीला-नीला रहने की ज़िद्द क्यों पड़ी है?” - - (“ऐसा ही क्यों?”) - - समर्पित, माँ को, नमन के साथ: “वह आस थी, मान थी, पूरा-पूरा आसमान थी, रात में तपी, दिन में जली, वह धुनरत समग्र दिनमान थी । - - (“माँ”)
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