History of Nagvanshi
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| Industry | Education |
|---|---|
| Location | Nagpur , Maharashtra, India |
| Introduction | नागलोक ही हड़प्पा - मोहेंजोदडो इस आदर्श संस्कृति के निर्माता और वाहक थे हड़प्पा - मोहेंजोदडो आदर्श नागसंस्कृति… वहा हुए उत्खनन ने प्राप्त सिक्कों पर नाग, वृषभ, पशुपति, बुद्ध पूर्व प्रतिके, चित्रित कि हुई है, .... बुद्ध धम्म यह विश्वधर्म था, बायबल और कुराणमें नागलोगो का उल्लेख आया हुआ हैl ""हम ही है जो सिन्धु संस्कृती के जनक है "" |
| Interests | नाग देश के मुलनिवासी है, जिन्होंने बुद्ध के विचारों को स्वीकारा तथा उसका देश विदेश में प्रचार किया .. आज भी नागसंस्कृति का इतिहास भारत सहित श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तिब्बत, जापान, इजिप्त इत्यादि देशों में दिखाई देता है, नाग लोगो के कारण ही आज बुद्ध धम्म पृथ्वी पर शेष है और हम भारतीय को गर्व होना चाहिए कि हम उन्हीं नागलोगो कि संतान है, नागो को ही विदेशी आक्रमणकारी आर्यलोग असूर, दानव, पातालवासी, राक्षस, यक्ष कहते थे। मायासुर, रावण, कंस, कालिया नाग, शुर्पनखा, हिडिंबा, हिरन्यकश्प्य, बलिराजा, होलिका, बकासुर ये सारे महामानव भारत के मुलनिवासी नाग थे, जो अंत तक देश कि खातिर, हमारे खातिर, नाग संस्कृति के खातिर अपने प्राण न्यौछावर करते रहे, और हम है कि उनको ही अपना शत्रु समझकर दशहरे को जलाते है, जागो नागो अपने इतिहास को जानो ! जय नागवंशी, जय मुलनिवासी |
| Favorite books | ""हम ही है जो सिन्धु संस्कृती के जनक है "" सिन्धु संस्कृती की खोज से ही भारत के संस्कृती का विकास कैसे हुआ इसकी खोज संभव हो सकी, सिन्धु संस्कृती यह नागोकी संस्कृती थी l जिन्हें द्रविड़ कहकर संबोध जाता है वे नागवंशी ही है l पुरात्तव विभाग के संशोधन द्वारा भारत में नवास्म (Neolithic),ताम्राशम (Chalcolithic), नमाशम- ताम्राशम (Neolithic-Chalcolithic)), व लोहयुगीन महाशंम (Megalithic) संस्कृती का विकास क्रम क्रम से होता रहा यहाँ हमें दिखाई देता है l यह जो सांस्कृतिक विकास हुआ, वह उस काल के द्रविड़ियन संस्कृती के लोगो ने अर्थात नागवंशियो ने किया है l पुस्तक: प्राचीन भारतातील नाग लेखक : एल एच कोसारे प्रकाशन : नेहा प्रकाशन १२०, गुरुनानक पुरा, नागपुर १७, महाराष्ट्र किमत : १८०/- (पृष्ट संख्या २८८) |
