DR. ANWER JAMAL

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Introduction उस एक ईश्वर ने मनुष्यों को जो ज्ञान दिया है , उसपर चलना मनुष्य का धर्म है । उसने मनुष्य को सदा एक ही ज्ञान दिया है , इसलिए मानव जाति का धर्म सदा से एक ही चला आ रहा है 'पूर्ण समर्पण भाव से ईश्वर की आज्ञा का पालन करना'। जो सदा से चला आ रहा हो, उसे संस्कृत में 'सनातन' कहते हैं । 'पूर्ण समर्पण भाव से ईश्वर की आज्ञा का पालन करना' अरबी में 'इस्लाम' कहलाता है । इस तरह जो भी ज्ञानी तत्वदृष्टि से देखेगा वह यही पाएगा कि सनातन और इस्लाम, एक ही धर्म के दो नाम हैं , दो अलग अलग भाषाओं में । सनातन और इस्लाम न तो दो धर्म हैं और न ही इनमें कोई विरोधाभास ही पाया जाता है । जब इनके मौलिक सिद्धांत पर हम नज़र डालते हैं तो यह बात असंदिग्ध रूप से प्रमाणित हो जाती है ।

क्या विद्वानों ने बोलने से पहले ख़ूब अच्छी तरह सोचने के लिए नहीं कहा है ?