Vikash Kumar
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| Gender | Male |
|---|---|
| Industry | Student |
| Occupation | शब्दों में खुद को और खुद में शब्दों को रचना । |
| Location | वर्धा, महाराष्ट्र, India |
| Introduction | पढ़ने, लिखने और सीखने की प्रक्रिया में लगा एक आम इंसान जो अब दुनिया के लिए विद्यार्थी से शोधार्थी में तब्दील हो चुका है । पिछले 9 वर्षों से औपचारिक रूप से पत्रकारिता और जनसंचार का अध्ययन । वर्तमान में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार में पीएच.डी (जनसंचार) की उपाधि हेतु अध्ययनरत । यूजीसी-नेट- 2017 यूजीसी-जेआरएफ-2018 |
| Interests | प्रकृति की बनाई हर उस चीज से प्यार करना जिनसे इस दुनिया को रचा गया है, संवारा गया है । इसी खूबसूरती को शब्दों में ढालने की गुस्ताख़ी करता रहता हूँ । पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच प्यार का ककहरा सीखते हुए "प्यारकारिता" लिखने का भी ख़ुमार है। |
| Favorite movies | हर वो फ़िल्म जिसमें दुनिया के स्याह चेहरे के बीच उम्मीद और प्यार का गीत, उसका उत्सव, उसकी कहानियाँ शामिल हो । |
| Favorite music | हर वो गीत-संगीत जो उदासी में और उदास कर दे और मुस्कुराहट में और खुशियाँ घोल दे । |
| Favorite books | प्रेमचन्द..निराला..नागार्जुन..जैसे विभूतियों ने पढ़ने के प्रति ललक जगाने का काम किया। आज कोई भी एक किताब मुकम्मल नहीं लगती, बल्कि मैं आख़िरी सांस के चलने तक कुछ-न -कुछ पढ़ते रहना चाहता हूँ। |
Your superpower is that you smell like dandelions whenever someone lies. How will you maintain your secret identity?
सामने वाले का चेहरा ही सब बयां कर देता है और वैसे भी झूठ की कोई महक नहीं होती ।

