Bilaspur Press Club
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| Introduction | समय की शिला पर सच का इतिहास लिखते एक दशक पूरे... इस सफ़र में बहुत कुछ बदला... कोरे कागज़ पर शब्द साधते कभी उंगलियों पर मचलती थी कलम... पर अब उंगलियां खुद मचलती हैं की-बोर्ड पर... लिखने-छापने का काम... देखने-दिखाने का हो गया है। देशबंधु, दैनिक भास्कर, हरिभूमि होते हुए इन दिनों ज़ी 24 घंटे, छत्तीसगढ़, रायपुर में एसोसिएट प्रोड्यूसर, क्राइम। इस सफ़र में ख़बरों से लिपटी ज़िंदगी की तस्वीर कुछ ऐसी ही है- अब तो ये हालत है कि ज़िंदगी के रात-दिन, सुबह मिलते हैं मुझे अख़बार में लिपटे हुए। |
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