कुण्डलिनी एवं तंत्र
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| Introduction | जीवन की प्रत्येक क्रिया तन्त्रोक्त क्रिया है , प्रकृति , तारा मंडल , मनुष्य का संबंध , चरित्र , विचार , भावनाए सब कुछ तंत्र से चल रहा है ईसे ही जिवन तंत्र कहा गया है ।जीवन मे कोई घटना मनुष्य को सुचना देकर नही आती । काल के गती को पहचान पाने की शक्ती सामान्य व्यक्ती मे नही होती । साधनोओं के द्वारा प्राप्त ऊर्जा की उच्च अवस्था में समझ और बोध की अवस्था भी उच्च होती है। पूरे के पूरे योगिक सिस्टम का मकसद आपकी समझ और बोध को बेहतर बनाना है। यही हमारा ऊद्देश है । परमाणु को आप देख भी नहीं सकते, लेकिन अगर आप इस पर प्रहार करें, इसे तोड़ दें तो एक जबर्दस्त घटना घटित होती है। जब तक परमाणु को तोड़ा नहीं गया था तब तक किसी को पता भी नहीं था कि इतने छोटे से कण में इतनी जबर्दस्त ऊर्जा मौजूद है। हर कोई एक जैकपॉट पर बैठा हुआ है, लेकिन सब गलत दिशा में देख रहे हैं। वे खजाने की ओर नहीं देख रहे। इसलिए उन्हे पता ही नहीं चलता कि ऐसा कुछ वहां है। |
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