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| Introduction | जब जो ह्रदय ने जैसा महसूस किया हमारी कलम ने उसे पंक्ति बद्ध कर दिया। सारी कविताएँ बिना किसी प्रयास स्वतः ही लिख गई हैं,क्यों कि जब भी दिल को कुछ छूता है भाव उठते हैं हमारा बस हमारी कलम पर नहीं रहता। ये क्या है कैसा है ये तो नहीं पता पर हाँ जो भी है स्वाभाविक है,सिवाय भावनाओं के कुछ नहीं। इनमें से कुछ कविताएँ पूर्व प्रकाशित हैं और कुछ लखनऊ दूरदर्शन के कार्यक्रम (नये हस्ताक्षर)में शामिल हो चुकी हैं। कविताओं के अलावा भी आप (मेरे विचार),(अभिलेख)आदि नित नये विषय ह्रदयानुभूति के अन्दर पाएँगे। आपके सुझाव व टिप्पणियाँ हमारा मार्ग दर्शन करेंगे। अतः दिल से स्वागत है आपका। |

