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विकास बहुगुणा
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IndustryCommunications or Media
LocationIndia
Introductionजैसे कूपमंडूक सोचता है कि कूप ही संसार है वैसे ही छुटपन में ये पहाड़मंडूक भी सोचता था कि पहाड़ ही संसार हैं...यानी पहाड़ों के बिना संसार का न कोई आधार है और न पहाड़ों के परे संसार का कोई विस्तार...ताजी हवा, नीले आकाश, साफ पानी को तब तक मैं बहुत हल्के में लेता था. लेकिन पहाड़ की ढलान से सरपट फिसलता हुआ जब दिल्ली आया तो पता चला कि पहाड़ के परे भी संसार है और संसार के इस विस्तार में ताजी हवा, नीला आकाश और साफ पानी हल्के में लेने वाली चीज नहीं
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