अपने को अभी तक डिस्कवर करने की मश्शकत में हूँ । बड़ा दुष्कर है,स्वयं के विषय में ईमानदारी से कुछ बताना,कम से कम मेरे लिय्रे । मैं कोई अतिमानव नहीं, बस एक छोटे उनींदे शहर के चिकित्सक को यहाँ से आकाश का जितना भी टुकड़ा दिख पाता है, उसी के कुछ रंग साझी करने की तलब यहाँ मेरे मौज़ूद होने का कारण है । साहित्य मेरा व्यसन है और कुछ बची खुची संवेदनायें मेरी पूँजी ! और कुछ ? वह भी अन्वेषित कर पाने पर अवश्य बताऊँगा !